देखो, आज खुशियाँ छाईं हैं
देखो, आज खुशियाँ छाईं हैं
न बिजली, न तूफान
आज शांत बारिश आई है
और
अपने साथ मंद समीर लाई है।
न पत्तियाँ टूटेंगी, न शाखाएं
न हिलेगा वृक्षों का तन
और न होगी जीवन जड़ता की जंग
क्योंकि
बारिश, हर बूंद में,
शांति की बहार लाई है।
देखो, आज खुशियाँ छाईं हैं।।
ये लघु बूंदे, करती रोमों से लड़ाई हैं
न हार, न जीत
मिलते देखो!, दो भाई है
न क्षेत्र की जंग
और न होगा प्यार में भंग
क्योंकि
ये प्यार वाली लड़ाई है
आखिर दोनों! एक माँ से दो भाई हैं।
देखो, आज खुशियाँ छाईं हैं।।
खिले गुलाब देखो!, न आज पछताते हैं
बूंदो को समा अंदर मौज उड़ाते हैं
लहराते हैं, गाते हैं
मानो खुशियाँ मनाते हैं
क्योंकि
बारिश मनमोहक से भर आई है
और शांत पवन साथ लाई है।
देखो, आज खुशियाँ छाईं हैं।।
धरती पर गिरती बूंदे
मिट्टी में समा, कुछ यूँ छाई हैं
जिसे सूंघ कोयल भी चहचाहाई है
और
मंद समीर, जिसने खुशियों की रेल बनाई है
पेड़ो का कोलाहल,
पत्तियों का टकराना
जिसने एक आस जगाई है
शांत जीवन की
और शांत मन की
बारिश, शांत होकर आई है
और शांत मन का संदेशा लाई है।
देखो, आज कितनी खुशियों की बहार आई है।
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