कविता क्या है?
प्रवाहित भावों की जलधारा से
गीले होते पुष्पों की माला से
होती अलंकृत
और उनके रस से भरती ऊपर तक
लेखनी
निकाले रस
और भिगा दे पूरे पन्ने को
और उड़ाए भावों को 'गाला'¹ से²।
और बना दे नीरस घर को
मधुर, रसपान 'शाला' से।
बंधे कम शब्दों में
लेकिन
निकले तब, एक शब्द हजार 'भाला' से।
एक जगह हजार अर्थ
पेड़ों की 'डाला' से।
ये कविता है।
1. रुई का टुकड़ा जो हलके होने के कारण हवा में इधर-उधर उड़ जाता है।
2. से अर्थात् उसकी तरह।
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