बिछड़न
दुख, कई आते हैं
कई जाते हैं,
वो लोग
दुख में साथ निभाते है।
और जब,
किसी दिन
वो ही दुख दें जाते हैं,
बिछड़ने का दुख;
सहन शक्ति से सह जाते हैं।
वरना
रो देते।
लेकिन
दुःखी, थोड़ही देखना चाहते हैं;
इसलिए सह जाते हैं।
लेकिन
हमेशा, थोड़ही चले जाते हैं;
बिछड़कर,
नया जीवन जीना चाहते हैं।
फिर
हो सके तो अंत तक साथ निभाते हैं,
या वादा कर जाते हैं।
वो लोग
बिछड़ते हैं
पुनः मिलने के लिए।
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