पतझड़

आज मैंने पेड़ो  से बात की 
पूछा 
आ गया तुम लोगों का मौसम 
जिसमें बदलाव आता है 
पुराना मरकर 
नया जन्म पाता है
खुश तो करता होगा 
बढ़ती है तुम्हारी सुंदरता 
पुराना मरकर 
जब तुम्हारा अंश बन जाता है
हे पेड़ों!
ये झड़न 
तुम्हें तड़पाती है?
पुराने से बिछड़ने का 
दर्द कराती है?
या तुम खुश होते हो
कि चलो 
बला टली?
या रखते हो साम्य भाव
कि 
ये तो पत्तों का भाग 
मेरा क्या बने उपाव?
और 
बिन उत्तर जाने 
मैं आगे बढ़ गया 
अपनी पतझड़ राह पर। 

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