भयानक रस
एक रात्रि की गहन बात
गाड़ी थी चार लोग थे साथ
शायद रुकना चाहे
राह पर
उस गहन वन में
बड़े से पीपल के तले
एक निवास था
समझ न पाया कोई
बड़ा सा भवन
और ज्यादा बड़ा था
उस वन में वृक्ष का तन
वो तो युवक थे
आधुनिक संसार के
रोमांच से भरपूर
कोई डर रहा था
कह रहा था रहने दो
कोई उसको डरपोक कर रहा
एक कहता
हमने क्या खोजा
शायद खोजी होगा
बचे दो ने भी कुछ कहा
उसके पश्चात्
चुनाव हुआ
अंदर जाए या आगे बढ़े
इन बातों के मध्य
भयंकर युद्ध छिड़ा
तीन एक से युद्ध को जीता गया
सभी साथ गए
खोजी रोमांचित
डरपोक भयभीत
दो समान स्थिति में
द्वार पर पहुँचे
रोमांचित करती हुई आवाजें
डराती हुई भी
चारों तरफ गूंज रही
तभी
द्वार खुला
और
जैसे ही एक कदम बढ़ा
डरपोक भाग गया
पता नहीं कहाँ
शायद गाड़ी की तरफ
या फिर........
कहीं तो गया
या ले जाया गया
कोई नहीं जानता
शायद कहीं मिल जाये
अंदर या बाहर
ऊपर और नीचे
कहीं भी सम्भावित है
उन तीनों का एक कदम पूरा हुआ
दूसरा आगे बढ़ाया
लेकिन पूर्णता से पहले ही
दुबारा वही आवाजें
लेकिन कुछ तेज
ऐसा लगा
कुछ कह रहीं हों
शायद वापस जाने को
या और कुछ
और
बीच मे जब वह पहुँचे
तब
एकदम
स्तंभित हो गए
न जाने क्यों
पर
रोमांचित भी डरने लगा
और दोनों का हाल
कुछ कह नहीं सकते
चारों तरफ
चमगादड़ उड़ते हुए
कुछ ने हमला भी किया
भेड़िये चीखते
उल्लू भी आवाज निकालते
और
तभी
एक अजीब सी आवाज
कुछ बुलंद
कुछ सहमी
कुछ डरी
और लग रहा था कि
कोई चेतावनी दे रही हो
शायद वापस लौट जाने की
तभी
एक चेहरा
कुछ घाव
कुछ खुदरा
कुछ निशान
और कुछ जला हुआ
दिखाई पड़ा
देखा देखा सा
शायद डरपोक दोस्त का ही
वो खड़ा था
उस निवास पर
कभी इस खिड़की पर
कभी उस खिड़की पर
कभी ऊपर की
और कभी उनके सामने
और कभी उनसे दूर
कुछ कह रहा था
शायद अपनी कहानी
या उन लोगों की गलती
या लौट जाने की बात
कुछ तो......
वही कह रहा था
प्रतिप्रश्न बिल्कुल भी नहीं
न के बराबर
शायद किसी में हिम्मत नहीं थी
न ही जज्बा था
कोई बोल ही नहीं पा रहा था
लग रहा था मानो
शक्ति खो दी हो
बोलने की शक्ति
बात करने की शक्ति
शायद डर से भूल गए हो
कि कैसे बोलना है
उसने बोला
उन्होंने बड़े ध्यान से सुना
कर्कश आवाज
कानों को चुभती हुई
कोई और सुने
बहरा हो जाये
इतनी कर्कश आवाज में
उन्होंने सुना
वापस लौट जाने की बात
उसने कहा
और इतिहास बताया
कितनी पुरानी है
और
जिन खोजा वह जाइया
परलोक
इहलोक से दूर
इसलिए चेतावनी
देखो दोनों द्वार खुले हैं
बहिरंग और अंतरंग
तुम्हारा निर्णय
समय कम है
जल्दी
जल्दी
जल्दी
ऐसा लग रहा था
पूरी प्रकृति निर्णय जानने को जिज्ञासी हो
चारों ओर से एक ही आवाज
उसी कर्कश स्वर में
वह भागें
कहाँ
सभी जानते हैं
गाड़ी की ओर
लेकिन
जब
रोमांचित ने मुड़ देखा
धीरे-धीरे हवा में
लहराते हुए
किसी भयानक पक्षी के रूप में
दो पंख
बड़े-बड़े
निकल पड़े
वह पता नहीं कैसे
लेकिन हवा में उड़ने लगा
अचानक ही
एक आदमी और दिखाई पड़ा
वह भी हवा में उड़ रहा
लेकिन
एक अजीब बात
वह हवा में लेटा था
ऐसा लगा
शायद वह काला जादू
या कुछ और
लेकिन कोई भी देखता
सहम जाए
इतना भयानक मंजर
और जैसे ही रोमांचित को
उसका चेहरा दिखा
वह भी इतना डर गया
मानो उसने
अपना मरण देख लिया
क्योंकि
उसने अपना चेहरा देख लिया
वही कपड़ें
वही चेहरा
वही सम्पूर्णता
वह सहम गया
वह डर गया
वह सबसे तेज दौड़ा
उसने जहाँ भी देखा
वही मंजर दिखाई पड़ा
उस व्यक्ति की मौत का मंजर
मुख से, नाक से
कान व आंखों से भी
लगातार बहता रक्त
सिकुड़ता हुआ शरीर
मुड़ते हुए पैर, हाँथ
और धीरे -धीरे
राख में बदलता हुआ
वह शरीर
रोमांचित को इतना सहमा देता है
वह वहीं मूर्छित हो जाता है
अन्य दो उसे उठाकर भागते हैं
और
जैसे ही
द्वार के बाहर
पहुँचे
होश में आ गया रोमांचित
तेज, तेज
सभी कहने लगे
गाड़ी पर पहुँचे
और देखा
डरपोक वहीं सो रहा है
उठाया उसे
पूछा उससे
उसने बताया
या सबको डराया
क्योंकि
वह तो अंदर था
दावा ठोका
वह भगा था
गाड़ी के अंदर सो गया
कोई समझ न पाया
ये सपना था या हकीकत
वही चारो पहले जो जिंदा थे
कहानी नानी ने जो कही
वही सच बन गई
ये कल्पना थी या सच
किसी ने न जाना
गाड़ी शुरू की
और भाग गए
लेकिन
जैसे ही पीछे देखा
भौचक्के रह गए
लालटेन लिया व्यक्ति
हाथ हिला रहा था
शायद अलविदा कह रहा था
हो शायद यह उसी की माया
लेकिन कोई कुछ भी समझ न पाया
गाड़ी भगायी गई
उस निवास से दूर
इतनी दूर
कि वह दिखाई देना बंद हो गया
वह लोग पहुच गए थे अपने घर
लेकिन
रोमांचित अब डरपोक बन गया
ये घटना
घटना न होकर
अभिशाप बन गई
और
वह एक रात्रि
रात्रि की भांति
ऐसे गुजरी
कोई सो नही पाया
डरपोक को छोड़कर
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